Goa
शिमला के जंगल में भालू वाला पेड़

कहा जाता है कि सैंकड़ों वर्षों पूर्व ये आदमख़ोर भालू किसी व्यक्ति के पीछे दौड़ रहा था. तो उस व्यक्ति ने पथरी माता (पुराना जुन्गा में स्थित पथरी माता मंदिर) से प्राथना की,  हे माता! इस भालू से मेरे प्राणों की रक्षा कीजिये. ये कहते हुए व्यक्ति एक देवदार के वृक्ष पर चढ़ने लगा. भालू भी व्यक्ति के पीछे पेड़ पर चढ़ने लगा और जैसे ही पेड़ के मध्य में पहुँचा तो पूरा भालू लकड़ी का बन गया. (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) सदियों से जीवित ये पेड़ और उस पर चिपका लकड़ी का भालू आज भी सदियों पुरानी हक़ीक़त बयान करता है.