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हड़ताल से बैंकों में ठप्प रहा काम, मजदूरों ने सरकार के खिलाफ निकाला गुब्बार

नेशनल न्यूज़ नेटवर्क | January 09, 2019 08:44 PM

शिमला : वाम समर्थित केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुधवार को भी राजधानी शिमला में विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े कर्मचारियों व मजदूरों ने हड़ताल में भाग लिया तथा एक रैली का आयोजन का केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ गुब्बार निकाला। इस दौरान एसबीआई को छोड़कर अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों में भी कामकाज ठप्प रहा, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। एलआईसी सहित अन्य केंद्रीय संस्थानों में भी हड़ताल का आंशिकर असर रहा। हालांकि प्रदेश सरकार से संबंधित अधिकतर सरकारी संस्थानों में काम काज बदस्तुर चलता रहा।

राजधानी शिमला के सब्जी ग्रांउड में एकत्रित हुए मजदूर यूनियनों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किए। जनसभा को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य अध्यक्ष जगत राम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय से देश भर में 70 लाख से अधिक लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा था। जबकि सरकार में आने से पहले उन्होंने 2 करोड़ नए रोजगार देने का वायदा किया था। लेकिन आज के समय केंद्र सरकार विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उदारवादी नीतियों को अपना रही है। बड़ी-बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर्मचारियों के हितों को नजरंदाज किया जा रहा है।

इंटक नेता बीएस चैहान ने कहा कि प्रदेश की जय राम सरकार जहां एक ओर विधायकों और मंत्रियों के लाखों रुपए वेतन कर चुकी है और मंत्रीमंडल अपने लिए महंगे लग्जिरी वाहन खरीद रहा है। वहीं जब प्रदेश की आंगनबाड़ी वर्कज, मीड-डे-मील जैसे दिहाडीदार वर्कज की बात आती है तो सरकार दीहाड़ी में 50 से 20 रुपए बढ़ौत्तरी कर अपनी पीठ थपथपाती है। इसलिए हम सभी ट्रेड यूनियनों से जुड़े कर्मचारियों व मजदूरों से आह्वान करते हैं कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरुप प्रदेश में भी 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन के लिए संघर्ष करेंगे।

उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि 60 से 58 साल नौकरी करने वाले कर्मचारियों को सरकार पुरानी पैंशन व्यवस्था से पैंशन नहीं दे रही है। ये उसी तरह कि जैस कोई जीवन भर काम लेने के बाद कर्मचारियों को लात मार कर बाहर कर दे।

 

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